हरी भरी वादियों से दूर, बर्फ से ढके पर्वतों का नूर : किब्बर 

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किब्बर ग्राम हिमाचल प्रदेश के दुर्गम जनजातीय क्षेत्र स्पीति घाटी में स्थित है, जिसे शीत-मरुस्थल के नाम से भी जाना जाता है। यह समुद्र तल से 4,850 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यहां पर बहुत से बौद्ध मठ हैं।�
प्राकृतिक सौंदर्य
गोंपाओं और मठों की इस धरती में प्रकृति के विभिन्न रूप परिलक्षित होते हैं। कभी घाटियों में फिसलती धूप देखते ही बनती है तो कभी खेतों में झूमती फसलें मन मोह लेती हैं। कभी यह घाटी बर्फ के दोशाले में दुबक जाती है तो कभी बादलों के टुकड़े यहां के खेतों और घरों में बगलगीर होते दिखते हैं। घाटी में कहीं सपाट बर्फीला रेगिस्तान है तो कहीं हिम शिखरों में चमचमाती झीलें।
समुद्र तल से इतनी ऊंचाई पर स्थित किब्बर ग्राम में खड़े होकर ऐसा लगता है मानो आसमान अधिक दूर नहीं है। बस थोड़ा सा हवा में ऊपर उठो और आसमान छू लो। यहां खडे होकर दूर-दूर तक बिखरी मटियाली चट्टानों, रेतीले टीलों और इन टीलों पर बनी प्राकृतिक कलाकृतियों से परिचित हुआ जा सकता है। लगता है कि इस धरती पर कोई अनाम कलाकार आया होगा जिसने अपने कलात्मक हाथों से इन टीलों को कलाकृतियों का रूप दिया और फिर इन कलाकृतियों में प्राण फूंककर यहां से विदा हो गया।
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पहुंचने का मार्ग
किब्बर ग्राम में पहुंचने के लिए कुंजम दर्रे से होकर स्पीति घाटी पहुंचना होता है। इसके बाद 12 किमी का रास्ता बहुत कठिन है, लेकिन ज्यों ही लोसर ग्राम में पहुंचते हैं, शरीर ताजादम हो उठता है। स्पीति नदी के दाईं ओर स्थित लोसर, स्पीति घाटी का पहला ग्राम है। लोसर से स्पीति उपमंडल के मुख्यालय, काजा की दूरी 56 किमी है और रास्ते में हंसा, क्यारो, मुरंग, समलिंग, रंगरिक जैसे जैसे कई सुंदर ग्राम आते हैं। काजा से किब्बर 20 किमी दूर है।

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