अंतरराष्ट्रीय संस्था पापुलेशन क्राइसिस कमेटी ने जिस देश को सर्वोत्तम आवासीय क्षेत्र घोषित किया हो, स्विस बैंकिंग ने जहां की राजधानी कोपेनहेगन के निवासियों को आर्थिक दृष्टि से सर्वसंपन्न करार दिया हो उस देश की सैर का मन तो करना ही था। हवाई अड्डे पर उतरते ही टर्मिनल की पंखदार आकृति ने प्रभावित कर दिया, संपन्नता से चौंधियाने वाली नहीं बल्कि स्वाभाविक सहजता वाले कोपेनहेगन ने आंखों को नहला दिया। गगनचुंबी इमारतों से परे क्षितिज के अनंत विस्तार ने हमारा इस्तकबाल किया। समृद्धि और वैभव के अतिरेक की कहीं कमी नहीं दिखी, दिखी तो बस समुद्री योद्धाओं का इतिहास संजोये प्राचीनतम स्कैंडनेवियाई शैली वाले पत्थरों से पटी सड़कें, सात-आठ सौ बरस पुराने चौक चौराहों वाली बहुस्तरीय जीवन प्रणाली।

व्यवस्था, स्वच्छता और सुरुचि का सुंदर समन्वय डेनमार्क की विशेषता है जिसका राज छिपा है डेनिश लोगों की अनुशासनप्रियता, समय पालन और अतिशय देश भक्ति में। डेनिश लोगों का करभार सर्वाधिक है पर कोई कर चोरी की तरकीबें सोचता दिखाई नहीं देता। सौ फीसदी साक्षरता और चुस्त-दुरुस्त देह से संपन्न डेनिश नागरिकों की जिंदादिली की चहक का सबूत चप्पे-चप्पे पर चस्पा नजर आता है।

कोपेनहेगन की सैर

कोपेनहेगन सड़कों के जाल से पटा हुआ है। यहां किसी भी नुक्कड़ पर हरे-भरे बगीचों, फव्वारों नहरों या जलाशय के रूप स्वच्छ निर्मल जल की शीतलता को महसूस किया जा सकता है। धन-वैभव से छल-छलाते इस शहर में पश्चिम के अन्य महानगरों की फर्राटेदार गाडि़यों से कहीं ज्यादा साइकिलों की रेलमपेल दिखाई देती हैं। पर्यावरण के प्रति बेहद सजग डेनिश लोग अधिकतर साइकिलों का ही उपयोग करते हैं। यहां 390 कि.मी. प्राकृतिक मार्ग केवल साइकिलों के लिए ही सुलभ है। यहां सिटी बाइसिकल सर्विस भी है जहां से साइकिलें निशुल्क ली जा सकती है। साइकिलों के प्रति इनका अगाध प्रेम मौसम की भी खबर देता है। बीच बाजार में टॉवर पर लगी लड़की यदि साइकिल चलाते हुए छाता लगाए रहती है तो मान लिया जाता है कि आज बारिश के आसार हैं। अगर साइकिल मजे-मजे में चलाई जाती रहे तो फिर मान कर चलिए कि आज मौसम खुशगवार है। शुद्धता और स्वच्छता की डेनिश आसक्ति ही भारतीय रिक्शों को सात समंदर पार ले आई है.. जिनपर सवार हो 150 से 200 डेनिश क्रोनर में पर्यटक स्थलों की घुमाई की जा सकती है। पेडलकेब्स के नाम से चर्चित इन रिक्शों के चालक या तो पोलिश हैं या फिर युगोस्लावियाई और क्रोएशियाई मूल के। पदयात्रियों का स्वर्ग कहलाने वाले कोपेनहेगन में पूर्व से पश्चिम तक विराट सर्प सी मीलों लंबी विस्तारित सड़क ‘स्ट्रोगेट’ को 1962 में विश्व का सर्वश्रेष्ठ पदयात्री मार्ग घोषित किया गया था।

तिवोली एम्यूजमेंट पार्क

साफ-सुथरी इस सड़क के दोनों तरफ डेनिश डिजाइनों के अत्यंत उच्च कोटि की गुणवत्ता वाले यांत्रिक उपकरणों की दुकानें और कलापूर्ण एंटीक वस्तुओं के अंबार वाली दुकानें मिलेंगी। स्ट्रोगेंट सड़क कई चौकों में विभक्त हैं। पूर्व में नया चौक नाइतोव है तो पश्चिम में सिटी हॉल चौक। रॉयल थिएटर, रॉयल अकादमी ऑफ आर्ट, सन् 1898 में बने ईलम्स के डिपार्टमेंटल स्टोर की ललचाती शो विंडोज को निहारते हुए मुख्यद्वार से गुजर कर सदियों पुराने निकोल चर्च के दर्शन कर गलियारों में लगी प्रतिष्ठित कलाकारों की नुमाइशों का नजारा लेते हुए पद यात्रा सिटी हॉल चौक पर खुद-ब-खुद संपन्न हो जाती है, जहां 209 मीटर सर्पाकार सीढि़यों पर चढ़कर पूरे कोपेनहेगन के विहंगम दृश्य को जीभरकर निहारा जा सकता है। प्रसिद्ध डेनिश दार्शनिक कीर्केगार्ड का स्मारक भी इसी मार्ग पर है। वापसी पर तिवोली एम्यूजमेंट पार्क से मुखातिब होंगे, इसे जगविख्यात डिज्नीलैंड की प्रेरणा का स्त्रोत माना गया है। ऐंद्रजालिक दृश्यों को साकार करने वाला यह मायालोक डेनमार्क के प्रसिद्ध परीकथा लेखक हेंस क्रिश्चियन एंडरसन की परिकल्पनाओं को साकार करता है। शाम होते ही एक लाख 18 हजार सात सौ अठारह रंग-बिरंगें बल्बों की जगमगाहट इस मायालोक को रोशनियों से नहला देती है।

शिल्प और साहित्य

चीनी शैली में निर्मित इस परी बाग में क्रिसमस के समय तो पांच लाख फेयरी लाइट्स, ग्यारह सौ क्रिसमस ट्री और डेढ़ सौ से ज्यादा यांत्रिक खेल लगाए जाते हैं। ‘द नाइटेंगल’ नामक परीकथा की तरह लगने वाला यह पार्क झूलों, कठपुतलियों, पारंपरिक डेनिश गायकों और रेस्तरांओं से हर वक्त रौनकदार रहता है। शिल्प और साहित्य डेनिश संस्कृति के अभिन्न अंग हैं। चौकों, भवनों के मुख्य द्वारों और फव्वारों पर डेनिश शिल्प वैभव के अद्भुत दृश्यावलियों वाले इस शहर को मत्स्य कन्या यानि ‘लिटिल मरमेड’ की मूर्ति के कारण भी प्रतिष्ठा मिली है। डेनमार्क की अस्मिता का प्रतीक बन चुकी हेन्स क्रिश्चियन एंडरसन की परी कथा की नायिका की यह प्रतिकृति विरहिणी मत्स्य कन्या गहन विषाद भाव से अपने प्रियतम की प्रतीक्षा में समुद्र की लहरों को सदियों से अपलक निहार रही है। जयशंकर प्रसाद की ‘कामायानी की विरह’ कथा यकायक आंखों में उतर आती है! 1913 में एडवर्ड एरिक्सन ने इस मूर्ति की रचना की थी। इसी मार्ग पर जेफियोन फाउटेन की कांस्य प्रतिमा है। चार बैलों पर आरूढ़ देवी जेफियोन का शिल्प उस पुरा कथा पर आधारित है जिसमें देवी ने अपने पुत्र को ही बैल बनाकर एक दिन और एक रात में जो भूमि जोती उसी से ‘जी लैण्ड’ द्वीप की उत्पत्ति हुई। बल्टिक सागर में स्थित 480 छोटे-छोटे द्वीप मिलकर डेनमार्क की संरचना करते है। जूलैण्ड, जी लैण्ड, फुनेने ओर बोर्नहोल्म प्रायद्वीप इसके मुख्य घटक है। ‘अगली डकलिंग’ जैसी चर्चित परी कथाओं के लेखक हेंस क्रिश्चियन एंडरसन, डेनिश चिंतक कीर्केगार्द मध्य युग के युद्ध वाद्य लूर के वादक और डेनमार्क की स्थापना से जुड़े बिशपों की मूर्तियां कोपेनहेगन के व्यक्तित्व को संस्कृतिमय बना देती हैं।

सन् 1417 से रॉयल सिटी के रूप में प्रतिष्ठित कोपेनहेगन में हर दोपहर 12 बजे रॉयल गार्ड की कदमताल कवायद को रोजेनबर्ग किले से अमीलियन बोर्ग किले के दरमियान होते देखने के लिए भारी तादाद में पर्यटक जुटते हैं। रॉयल लाइफ गार्ड्स की स्वर लहरियों पर चेंजिंग ऑफ द गार्ड को देखना अपने आप में अनोखा अनुभव है। कोपेनहेगन की सड़कों पर आज भी ऐसी दुकानें हैं जो रॉयल वारंट ‘शाही आज्ञा-पत्र’ को लगाने में प्रतिष्ठा का अनुभव करती है। शाही साजो-सामान के प्रति गहरे आकर्षण के कारण ही डेनमार्क में शाही महलों और किलों को विशेष रूप से संरक्षित किया गया है। अमीलियोबर्ग, रोजेनबर्ग, क्रिश्चियनबोर्ग, फ्रेडेन्स बोर्ग, हेलसिंगोर बोर्ग और क्रोनबर्ग ऐसे ही किले है जिनमें डेनमार्क के मध्ययुग का वैभव आज भी संचित है। क्रोनबर्ग का किला शेक्सपियर के नाटक हैमलेट की पृष्ठभूमि रहा है। हेलसिंगोर के बंदरगाह के छोर पर स्थित क्रोनबोर्ग का किला दुहरी प्राचीरों से घिरा है और सदियों पुरानी काष्ठ वेदिका वाले चर्च के लिए विशेष रूप से प्रख्यात है। इसी किले में होलगर द डेन की मूर्ति स्थापित है जो भारतीय पात्र कुंभकरण की तरह सदियों से सो रहा है पर लोग मानते हैं कि जब भी डेनमार्क पर कोई विपत्ति आएगी, तो वह जरूर अपनी प्रगाढ़ निद्रा से जाग उठेगा। कोपेनहेगन से 50 कि.मी. दूर स्थित फ्रेडेंस बोर्ग के शाही महल अठारहवीं सदी की आंतरिक सज्जा के जीवंत प्रमाण हैं। फ्रेडरिक्स

बोर्ग किले में डेनिश म्यूजियम ऑफ नेचुरल हिस्ट्री मौजूद है। रोजेनबर्ग के भव्य शाही महल 15वीं सदी में शाही आवास के तौर पर प्रयुक्त होते थे। आजकल यह किला शाही घराने के बहुमूल्य रत्नजडि़त आभूषण और तख्तों-ताजों का कोषागार है जिसकी रखवाली ठोस चांदी से निर्मित तीन सिंहों की प्रतिमाएं करती हैं। डेनमार्क में संग्रहालयों की बहुतायत है। नेशनल म्यूजियम, लूसियाना स्थित मॉर्डन आर्ट म्यूजियम, 86 एकड़ में विस्तारित विश्व का इकलौता ओपन एअर म्यूजियम, समुद्री योद्धाओं का इतिहास दर्शाता वाइकिंग शिप म्यूजियम दर्शनीय संग्रहालयों की फेहरिस्त में सम्मिलित है। यही नहीं, यहां के राष्ट्रीय पुस्तकालय में पचपन हजार बहुमूल्य पाण्डुलिपियां भी संरक्षित हैं।

क्रिश्चियाना टाउन

कोपेनहेगन में एक ऐसा स्थान भी है जो 1971 में अस्तित्व में आया। क्रिश्चियाना टाउन के नाम से चर्चित यह स्थल अपनी विचित्रता के चलते सैलानियों को आकर्षित करता है। रंगी-बिरंगी दीवारों वाले इस स्थान पर आर्मी की पुरानी बेकार करार दी गई बैरकों में स्वेच्छा से आ बसे हिप्पियों का बसेरा है जो निर्बाध और वर्जना हीन जीवन शैली जीने के हिमायती हैं। यहां तस्वीरें लेना मना है। इस क्षेत्र में पदार्पण से पहले किसी गाइड को साथ लेना ही समझदारी है। निहायत अनुशासन प्रिय डेनमार्क की यह एकमात्र ऐसी बस्ती है जिसमें कोई कानून मान्य नहीं है। प्रकृति के कानूनों को मानने वाले यहां अजीबोगरीब अंदाज में विचरण करते हैं। उत्तरी-सागर और बाल्टिक समुद्र के मध्य स्थित डेनमार्क की यात्रा करते हुए समुद्र आपका सहयात्री बना ही रहेगा। आप चाहे सागर तट पर न भी हों तो भी कहीं नहरों के रूप में मौजूद होगा तो कहीं समुद्री झीलों के रूप में। रौनकदार रेस्तरांओं और भीड़ भरे कहवा-घरों से पटे पड़े कोपेनहेगन में जिंदादिल और उन्मुक्त डेन नागरिक निरंतर आमोद-प्रमोद करते या सामूहिक खान-पान करते दिखाई देंगे। चौक-चौराहों पर लोकगायकों, वादकों और प्रदर्शनकारी कलाकारों की प्रस्तुतियां आपके पावों में भी थिरकन पैदा कर देंगी। कोपेनहेगन से कोई 300 कि.मी. पश्चिम में स्थित विबोर्ग की यात्रा से पारंपरिक देहाती जीवन शैली का जायजा मिल सकता है। पाइन और ओक के जंगलों से घिरे जूट लैण्ड के इस क्षेत्र का इतिहास 400 वर्ष पुराना है।

मध्ययुगीन ईसाई धर्म की पवित्र स्थली के रूप में विख्यात यह शहर पूर्व में बीसियों मठों का गढ़ रहा है। विबोर्ग में 1130 में निर्मित विश्व का सबसे बड़ा ग्रेनाइट गिरिजाघर है। यहां 1000 वर्ष प्राचीन सैन्य सड़क मार्ग भी स्थित है ग्याहरवीं शताब्दी में इसी सड़क से गुजरकर राजा कान्टे ने इंग्लैंड पर धावा बोला था। संभवत: इसीलिए यहां एंटीक वस्तुओं की दर्जनों दुकानें मिलती हैं। देहात का सोंधापन लिये विबोर्ग में पुरानी मान्यताएं और परंपराएं अब भी कायम हैं। खपरैल वाले साफ-सुथरे घरों के बाहर गुलाबी रिबन बंधी गुडि़या की तैनाती इस बात का संकेत है कि इस घर में बिटिया पैदा हुई है। चिडि़या की सुरीली गर्दन पर यदि नीला फीता बंधा हो तो मान लीजिए कि इनके घर लल्ला पैदा हुए है। लोग पुरानी परंपराओं तले अप्रैल माह में होली की तरह सामूहिक अग्नि प्रज्वलित करते हैं जिनमें चुड़ैलों के पुतलों की आहुति दी जाती है। क्रिसमस के अवसर पर पूरे कुनबे और टोले, मोहल्ले वालों के साथ क्रिसमस ट्री के चारों ओर गोल घेरा बना कर नाचते हैं। घर की घरैतिन बड़ी-बूढि़यों से सीखी पारंपरिक शैली में देहाती जड़ी-बूटियों का काढ़ा तैयार करती हैं। क्रिसमस की बर्फीली ठंड में इस चॉकलेट, बीयर, शक्कर और दूध वाले काढ़े को हलक से नीचे उतारे बगैर कोई भी दावत संपन्न नहीं होती।

डेनमार्क की खुशमिजाजी का राज पुरातन में नूतन के आनुपातिक संतुलन में निहित है। वास्तव में यह घी और दूध की नदियां बहाने वाली शस्य श्यामला धरती वाला ऐसा देश है जिसका एक एकड़ भी बेकार नहीं नजर आता। यहां घूमना और इससे हर पल सबक लेना जिंदगी के मायनों को समझने के लिए निहायत जरूरी है क्योंकि यहां सकारात्मक सोच का पाठ मस्ती की पाठशाला में नहीं पढ़ाया जाता बल्कि बचपन से ही खुद को दूसरों से श्रेष्ठ न समझने और निंदा न करने की नसीहत घुट्टी की तरह पिला दी जाती है। ऐसा देश तो खुशहाल होगा ही, है न!

कैसे जाएं

डेनमार्क जाने के लिए स्कैंडनेवियन एअरलाइंस, के अलावा सभी यूरोपियन एअर लाइंस मौजूद हैं जिनका किराया 38000 रु. के आस-पास बैठता है जर्मनी से डेनमार्क में प्रवेश के लिए एक ट्रेन भी है जो हैम्बर्ग से चलती है और ल्यूबक स्टेशन पर समुद्री जहाज में प्रवेश कर जाती है। सभी यात्रियों को डेक पर जाने के निर्देश दिये जाते हैं। समुद्री यात्रा समाप्त होने के कुछ देर पहले निर्देश मिलने पर यात्री दोबारा दो डिब्बों वाली ट्रेन में सवार होकर डेनमार्क पहुंच जाते हैं।

मुद्रा

डेनमार्क की मुद्रा 1 डेनिश क्रोनर भारतीय मुद्रा में 8 रु. बैठती है।

भाषा

वैसे तो ये लोग डेनिश भाषा बोलते हैं पर अंग्रेजी से परहेज भी नहीं करते।

मौसम

डेनमार्क की गरमियां तो अपेक्षाकृत बाकी यूरोप के ठंडी होती हैं लेकिन यहां की सर्दियां उतनी बर्फीली नहीं होतीं। गरमियों में औसत तापमान 16 डिग्री से. और सर्दियों में 0.5 डिग्री से. के आसपास रहता है। हवाएं खूब चलती हैं और सरदियों में तो खासकरके ज्यादा। बारिश पूरे साल होती है और सितंबर, अक्टूबर, नवंबर में सबसे ज्यादा।

कहां ठहरें

यहां ठहरने के लिए हर तरह के होटल हैं-बेड एंड ब्रेकफास्ट सुविधा, यूथ हास्टल, कॉटेज, पुराने महलों में, फार्महाउसों में, देहात में घरों में और शहरों में हर तरह की होटलों में। हर आयवर्ग व पसंद के लोगों के लिए मनमाफिक सुविधाएं यहां टिकने की हैं। इंटरनेट पर ही इनमें से ज्यादातर के लिए बुकिंग कराई जा सकती है।

समुद्र से घिरे इस देश में सी फूड के शौकीनों के लिए बहुतेरी स्वादिष्ट डिश हैं। दुग्ध पदार्थो के उत्पादन की बहुतायत के कारण चीज की अनेक किस्में शाकाहारियों को तृप्त करने के लिए पर्याप्त हैं। भाप में पकी हुई ईजी मछली, धुएं में धुआंई हेरिंग मछली लोग चाव से खाते हैं। हालांकि यहां की डेनिश पेस्ट्रीज और सैंडविचों का स्वाद भी जुबान पर चढ़ कर बोलता है। स्मोरे ब्रेड- सैंडविच के साथ ताजा मटर का सूप और आलू व पालक के विविध व्यंजन निरामिष भोजनार्थियों के लिए उपयुक्त है। डेनिश पूरे भोजन भट्ट होते हैं। ताजे फल, सब्जियां और ताजे दुग्ध उत्पादों की ताजगी इनकी दुरुस्त सेहत और लाल-लाल गालों वाले गदबदाये गोल मटोल बच्चों में निरंतर झलकती है। पचासों किस्मों की बीयर का उत्पादक डेनमार्क बीयर के शौकीनों की जन्नत है। यहां बहुत से भारतीय होटल हैं। इंडियन पैलेस होटल भी इनमें से एक है, जहां 100 रु. में एक समोसा और 150 रु. में आलू का परांठा तो खाया ही जा सकता है।

खरीद फरोख्त

डेनमार्क में बहुत कुछ है खरीदने के लिए। डेनिश फर कोट और मिंक कोट तो विश्व भर में मशहूर हैं। सफेद पृष्ठभूमि पर नीली आभा की दस्तकारी से सजे पोर्सलीन के मन-मोहक पात्र ‘रॉयल कोपनहेगन’ से खरीदे जा सकते हैं। हालांकि यहां की ज्यादातर दुकानें अम्बर ज्वैलरी से पटरी रहती हैं। ये जीवाश्मों से निर्मित वे आभूषण हैं जो समुद्री योद्धाओं के अलंकरणों के रूप में जाने जाते रहे हैं। करोड़ों वर्ष पूर्व पुराने पाइन के वृक्षों के जीवाश्मों से बने अंबर के पेडेण्ट, इयरिंग्स, ब्रेसलेट्स और मालाएं डेनिश वाइकिंग संस्कृति की परिचायक हैं।

डेनमार्क की शहराती और देहाती दोनों ही संस्कृतियों में पारंपरिक कलाओं को जिंदा रखने का अद्भुत जज्बा दिखाई देता है। यहां की महिलाएं डॉल हाउस या गुडि़याघरों का निर्माण बड़े जतन से करती हैं। यह कोई मामूली कला नहीं है। इस कला की संगोष्ठियां, प्रदर्शनियां, स्पर्धाएं आयोजित की जाती हैं। घरों में 1:12 के अनुपात का पालन करते हुए घर में रखी गई वस्तुओं को लघुत्तम रूप में प्रदर्शित किया जाता है। छोटे-छोटे बाग, रसोईघर, शयनकक्ष, ड्राइंगरूम, क्लीनिक, फर्नीचर और कालीन पर्दे, जितने ज्यादा से ज्यादा डिटेंलिग लिए घरों का निर्माण किया जाता है प्रादर्श उतना ही सर्वोत्तम माना जाता है। डेनमार्क में डॉल हाउसेज की कई दुकानें भी हैं जहां डेनिश महिलाओं की कलाप्रियता के नायाब नमूने मिल जाते हैं। इसके अलावा तमाम कतरनों को इकट्ठा कर तरह-तरह की ज्यामितिक आकृतियों के निर्माण वाली रजाइयां बनाना भी डेनिश महिलाओं का शगल है।

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