कुमाऊँ




उत्त्तरांचल राज्य के प्रमुख पर्यटक स्थलों में नैनीताल, मंसूरी, रानीखेत, अल्मोड़ा, कौसानी, देहरादून प्रमुख हैं। पर्यटक देहरादून एवं ऋषिकेश तथा नैनीताल से 36 कि.मी. पहले स्थित काठगोदाम नामक रेलवे स्टेशन तक रेल मार्ग से पहुंच सकते हैं तथा अन्य पर्यटक स्थलों पर पहुंचने का एक मात्र माध्यम अथवा परिवहन का साधन मोटर वाहन ही है। देवभूमि के नाम से पुकारे जाने वाले इस मध्य हिमालयी भाग में स्थित पर्यटक स्थलों का भ्रमण करने के दौरान एक अलहादा किस्म का रूमानी अहसास पर्यटकों को ताजिंदगी गुद-गुदाने के लिए काफी होता है। दरअसल उत्तरांचल के पर्यटक स्थलों का भ्रमण करने के दौरान जो आध्यात्मिकता पर्यटकों में प्रस्फुटित होती है वह मात्र इसी मध्य हिमालयी क्षेत्र की विशिष्टता है।

मुनस्यारी

उत्तरांचल क्षेत्र का एक और प्रसिद्घ पर्यटन स्थल है मुनस्यारी जो अभी पर्यटन मानचित्र पर उभर रहा है। यह क्षेत्र पिथौरागढ़ जनपद का सीमान्त क्षेत्र है। मुनस्यारी जाने के लिए काठगोदाम से अल्मोड़ा होते हुए सड़क मार्ग कर मनोरम यात्रा पर्यटक को उत्तरांचल क्षेत्र की प्राकृतिक सौंदर्य सम्पन्नता से परिचित कराने में खासी सहायक होती है। मुनस्यारी से पंचाचूली का मनोहारी बर्फ आच्छादित दृश्य भाव विभोर कर देता है।

अल्मोड़ा

कुमाऊँ मण्डल भी पर्यटक स्थलों की दृष्टि से खासा सम्पन्न है। नैनीताल से लगभग 70 कि.मी. दूर स्थित अल्मोड़ा भी एक रमणीक पर्यटन स्थल है। अल्मोड़ा कुमाऊँ के राजवंशों की राजधानी रहा है। यहां से मात्र 7 कि0मी0 की दूरी पर स्थित कसार देवी एवं 30 कि.मी. दूरी पर स्थित जागेश्वर धाम भी प्रसिद्घ पर्यटक स्थल है। कुमाऊँ अंचल का ही खूबसूरत और प्राचीन शहर है अल्मोड़ा। समुद्र तल से 5400 फीट की ऊंचाई व 11.9 वर्ग कि0मी0 क्षेत्रफल में बसा अल्मोड़ा कुमाऊँनी इतिहास व संस्कृति का केन्द्र है। चन्द्र शासकों द्वारा अपने राजधानी चम्पावत से स्थानान्तरित कर यहां लाई गई थी। चीड़ देवदार व बॉंज के वनों से आच्छादित अल्मोड़ा एक ऐसा पर्वतीय स्थल है जहॉं वर्षो पुराने मन्दिर, मूतियां व ऐतिहासिक किले दर्शनीय हैं। यहॉं का प्राकृतिक सौन्दर्य, आदर्श जलवायु तथा नयनों को अपार सुख प्रदान करने वाला हिमालय का विहंगम दृश्य एक ओर हजारों की संख्या में देशी-विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करता है तो कई पर्यटकों को यह रम जाने को भी लालायित कर देता है।

खगमरा व मल्ला महल किला

बसन्त ऋतु में यहां की छवि अत्यधिक दर्शनीय हो जाती है। इसीलिए गर्मियों में यहां अत्याधिक चहल-पहल तथा पर्यटकों का जमघट लगा रहता है। कभी आलम नगर के नाम से जाना जाने वाले अल्मोड़ा नगर के पूर्वी छोर पर खगमरा नामक किला है, जिसका निर्माण कत्यूरी राजाओं ने नवीं शताब्दी में कराया था। इसके अलावा कल्याण चंद्र द्वारा 1563 ई0 में बनाया गया मल्ला महल नामक किला (जहां वर्तमान में जिला मुख्यालय के कार्यालय हैं) तथा अल्मोड़ा छावनी में लाल मंडी नाम से जाना जाने वाला किला है। इन किला स्थलों में विभिन्न स्थानों के भव्य दर्शन होते हैं। अल्मोड़ा का नन्दादेवी मंदिर, मोहन जोशी पार्क, राजकीय संग्रहालय, ब्राइट एण्ड कार्नर, कसार देवी, कालीमठ, सिमतोला व मटेला आदि पर्यटकों के आकर्षक का प्रमुख केन्द्र है।

जहॉं एक ओर पर्यटक, प्रकृतिप्रेमी व कला प्रेमी यहॉं मोहन जोशी पार्क, नन्दादेवी मन्दिर, ब्राइट एण्ड कार्नर में घण्टों बैठ कर प्रकृति की अद्भुत छवि का आनन्द लेते हैं, वहीं कला प्रेमी तथा इतिहास व पुरात्तव के जिज्ञासु राजकीय सग्रहालय में जाने में रूचि लेते हैं। अल्मोड़ा शहर से करीब 8 कि0मी0 दूर कसारदेवी 6 कि0मी0 दूर चितई, 5 कि0मी0 दूर कालीमठ से दिखने वाला प्रकृति व हिमालय की ऊंची-ऊंची प्रर्वत श्रेणियों का अनोखा व मनोहारी दृश्य पर्यटकों व प्रकृति प्रेमियों के हृदय में आनन्द व कुदरत की लीला की अमिट छाप छोड़ते हैं।

सिमतोला व मटेला

वहीं दूसरी ओर बस स्टेशन से दो कि0मी0 दूर ब्राइट एण्ड कार्नर नामक स्थान प्रकृति के मनमोहक नजारों के साथ-साथ डूबते सूरज का मनोहारी दृश्य का अवलोकन कराकर पर्यटकों को आनन्द पहुंचाता है। यही नहीं अल्मोड़ा से मात्र 3 कि0मी0 दूर सिमतोला व करीब 10 कि0मी0 दूर मटेला पर्यटकों के पिकनिक स्थल के रूप में जाने जाते हैं। अल्मोड़ा के पूर्व में सुयाल नदी तथा पश्चिम में कोसी नदी बहती है तो उत्त्तर दिशा में बर्फ से ढके चौखम्बा, नीलकंठ, कामेट, नन्दाघुटी, त्रिशूल, नन्दादेवी, नन्दादेवी ईस्ट, नन्दाकोट, एवी, नम्बा, पंचाचूली आदि चोटियों के स्पष्ट दर्शन होते हैं। अल्मोड़ा नगरी की बाल मिठाई एवं सिंगौड़ी मिठाई पूरे भारत में ही नहीं अपितु विदेशों में भी मशहूर है।

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